भिक्षु जगदीश कश्यप
1908 - 1976
संस्थापक - निदेशक
नव नालंदा महाविहार
नालंदा, बिहार, भारत
नव नालंदा महाविहार में स्वागत है
पूज्य भिक्षु जगदीश काश्यप के अनुरोध पर नालंदा की विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने 1951 ई॰में मगध इंस्टीच्यूट आॅफ पोस्टग्रेजुएट स्टडीज एंड रिसर्च इन पालि एंड एलाएड लैंग्वेजेज एंड बुद्धिस्ट लर्निग की स्थापना की। कालांतर में यह नव नालंदा महाविहार के नाम से जाना जाने लगा।

भिक्षु जगदीश कश्यप नव नालंदा महाविहार के संस्थापक निदेशक बने और फरवरी 1955 तक इस पद पर बने रहे। उनके प्रमुख येागदानों मे से एक था - 41 खंडों में सम्पूर्ण पालि त्रिपिटक का समालोचनात्मक संस्करण देवनागरीलिपि में प्रकाशित करवाना। यह बहुत लोकप्रिय हुआ और शीघ्र ही अप्राप्य हो गया। इस महाविहार की स्थापना के पीछे इसे प्राचीन नालंदा महाविहार के अनुरूप पालि तथा बौद्ध धर्म के उच्चतर शिक्षा केंद्र के रूप् में विकसित करने की अवधारणा थी। प्रारंभ में इस संस्था ने एक आवासीय संस्था के रूप् में सीमित संख्या में भारतीय एवं विदेशी छात्रों के साथ कार्य किया।
नालंदा और प्राचीन नालंदा महाविहार के भग्नावशेष एक दूसरे के पयार्य है। प्रायः नालंदा नाम से प्राचीन नालंदा महाविहार की छवि उभरकर आती है, जो 5वीं से 7वी शताब्दी के बीच लगभग 700 वर्षों तक बौद्ध शिक्षा का एक महान केंद्र था। बौद्ध शिक्षा के विकास में नालंदा महाविहार का योगदान सर्वविदित है। नालंदा विश्वविद्यालय के अनेक आचार्यो ने पूरी दुनिया में बौद्ध संस्कृति एवं ज्ञान के प्रचार-प्रसार में सहायता की है।

भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति महामहिम डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद के मन में यह विचार आया और उन्होंने बौद्ध शिक्षा के प्राचीन केंद्र नालंदा की प्राचीन गरिमा को पुनस्थापित करने की घोषणा की और इसके परिणाम स्वरूप् नव नालंदा महाविहार की स्थापना हुई।

20 नवंबर 1951 को महामहिम राष्ट्रपति डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद ने प्रथम भवन की आधार शिला रखी, जिस पर निम्नलिखित शब्द उत्कीर्ण किये गये -
    ”उसे अंधकार की रात्रि (रसका अंधकार युग) व्यतीत हो जाने के उपरांत देशज भाषा (लोक भाषा सहित)
           को प्रकाशित करने हेतु नालंदा के सूर्य की रश्मियाँ इसी शिला के शिखर पर उदित है।“
नव नालंदा महाविहार की स्थापना 20 नवंबर 1951 को बिहार सरकार द्वारा पालि एवं बौद्ध धर्म के अध्ययन के निमित्त स्नातकोत्तर शिक्षण एवं शोध केन्द्र के रूप् में की गई। इस महाविहार की स्थापना का प्रेरणा-स्रोत प्राचीन नालंदा महाविहार के तर्जपर पालि एवं बौद्ध धर्म के उच्चतर शिक्षण केन्द्र के रूप् में विकसित करना था। संस्कृति विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने ऐ स्वायतशासी संस्थान के रूप् में 1994 ई॰ में इसका अधिग्रहण कर लिया। 13 नवंबर 2006 ई॰ को यू॰जी॰सी॰ ने नव नालंदा महाविहार को समविश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया। नव नालंदा महाविहार का वर्तमान परिसर पटना शहर से 100 कि॰मी॰ की दूरी पर ऐतिहासिक इन्द्रपुष्करिणी झील के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है और इसके उत्तरीतट के निकट प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष है।
कॉपीराइट © 2014. नव नालंदा महाविहार, नालंदा, बिहार, भारत. सभी अधिकार सुरक्षित.
नव नालन्दा महाविहार
(मानित विश्वविद्यालय)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

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