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पुस्तकालय
        पुस्तकालय ज्ञान का भंडार गृह और किसी संस्था के रीढ़ की हड्डी होता है। पूर्व में पुस्तकालय में केवल पुस्तकों और पांडुलिपियों का संग्रह होता था और इन्हें सुरक्षित रखा जाता था जबकि आधुनिक पुस्तकालय एक सूचना केन्द्र होता है जो विभिन्न रूपों में सूचनाओं का अर्जन, संग्रहण और प्रसार करता है। वर्तमान में पुस्तकालय में कुल 60,000 पुस्तकों का संग्रह है, इसके साथ ही अनेकों काष्ठचित्रीय तिब्बती पांडुलिपियाँ और कुछ दुर्लभ पांडुलिपियाँ हैं। यह बताना बिलकुल प्रासंगिक है कि पुस्तकालय ने डाॅ॰ आर॰बी॰ मुखर्जी, डाॅ॰ एन॰ दत्ता, डाॅ॰ नथमल टाटिया, प्रो॰ सी॰एस॰ उपासक, प्रो॰ कृष्ण नारायण प्रसाद मागध, प्रो॰ सियाराम तिवारी, प्रो॰डी॰ के बरूआ आदि जैसे बौद्ध विद्वानों के व्यक्तिगत पुस्तकालय को लेकर पुस्तकालय को समृद्ध बनाया है।
        स्व॰ आर॰बी॰ मुखर्जी के पुस्तकालय की विशेष चर्चा आवश्यक है क्योंकि इन्होंने पुस्तकालय को पूरव के पवित्र पुस्तकों का पूरा सेट, पालि टेक्स सोसाइटी के महत्त्वपूर्ण प्रकाशन भारतीय दर्शन पर दुर्लभ ग्रंथों का संग्रह, उच्च कोटि के अंग्रेजी साहित्य का समृद्ध संग्रह, विलियम शेक्सपीयर के सम्पूर्ण ग्रंथों का टीका सहित संस्करण, जर्मन भाषा में गोथे की कृतियाँ, एक महत्त्वपूर्ण फ्रांसिसी लेखकों कोरनीलणे और रेसिने की कृतियों का संग्रह महाविहार के पुस्तकालय को प्रदान किया।
        संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार द्वारा प्रदत्त अनुदान भी एक महत्त्वपूर्ण अनुदान था, जिसमें ह्वीटन लोन के संग्रह में सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक चिंन पर ग्रंथो का एक अच्छा संग्रह है जिसमें मनोविज्ञान अध्यात्म विद्या, नीतिशास्त्र, तर्कशास्त्र, समाजशास्त्र, सांस्कृतिक मानव विज्ञान आदि सम्मिलित हैं।
        म्यांमार (बर्मा) श्रीलंका, थाइलैंड तथा कम्पूचिया (कम्बोडिया) जापान तथा दक्षिण कोरिया ने अपनी-अपनी लिपि में प्रकाशित पालि त्रिपिटक का सम्पूर्ण संग्रह तथा अन्य मिश्रित ग्रंथो को महाविहार में अनुदान स्वरूप दिया। चीनी भाषा में लिखी त्रिपिटक का सम्पूर्ण संग्रह तथा अन्य मिश्रित गं्रथ चीनी गणतंत्र द्वारा उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ। तिब्बत के परमपावन दलाईलामा द्वारा अनुदानित तिब्बती त्रिपिटक का संपूर्ण संग्रह (पेकिंग संस्करण) सूची सहित, केग्युर का देर्गे तथा ल्हासा संस्करण तथा तग्चूर का देर्गे एवं ना-यांग संस्करण भी महाविहार के पुस्तकालय की अमूल्य धरोहर है। शोध की वर्तमान प्रवृत्तियाँ को ध्यान में रखते हुए महाविहार के पुस्तकालय में बौद्ध धर्म तथा भारतीय विद्या से सम्बद्ध राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शोध-पत्रिकाएँ मँगायी जाती हैं। महाविहार में दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह भी है।
        वर्तमान समय में महाविहार का पुस्तकालय दो मंजिले भवन में स्थित है, जिसे पुस्तकालय भवन के नाम से जाना जाता है। इसमें 16 शोध कक्षों सहित एक-एक बड़े कमरे दोनों ओर स्थित है। पुस्तकालय एक आदर्श पुस्तकालय बनने की प्रक्रिया में है।

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नव नालन्दा महाविहार
(मानित विश्वविद्यालय)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
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