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श्वेनत्सांग स्मृति भवन
बौद्ध भिक्षु श्वेनत्सांग, जिसने सातवीं शताब्दी में चीन से भारत की प्रसिद्ध सिल्क मार्ग से यात्रा की ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती प्रदान किया। एक राजनयिक की तरह उन्होंने जिन राज्यों और सामाज्य की यात्रा की इनको जोड़ा। वह एक प्रकांड विद्वान या जिसने शान की प्रति राज्य को सीमा से बाहर निकल कर यात्रा की और अपनी यात्रा के क्रम में वे जिससे भी मिले उनके उत्साह ने सभी को प्रोत्साहित किया।
नव नालंदा महाविहार के संस्थापक निदेशक माननीय भिक्षु जगदीष काश्यप ने सर्वप्रथम चीनी विद्वान भिक्षु श्वेनत्सांग को ज्ञान की खोज की उत्कृष्ट अभिलाषा और भारत चीन के बीच मित्रता बढ़ाने के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए भारत-चीन मैत्री के प्रतीक के रूप में श्वेनत्सांग स्मृति हाॅल की स्थापना का प्रस्ताव दिया।
भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और चीन के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री चाऊ एन लाई के प्रयासों के फलस्वरूप जनवरी 1957 में श्वेनत्सांग स्मृति भवन का निर्माण कार्य आरंभ हुआ और नव नालंदा महाविहार में एक समारोह का आयोजन कर चीनी सरकार से श्वेनत्सांग की अस्थ्यिों का कुछ अंश सहयोग राशि तथा कुछ चीनी बौद्ध साहित्य भारत सरकार ने प्राप्त किया। 1984 ई॰ में श्वेन् त्सांग स्मृति-भवन का निर्माण कार्य पूरा हुआ।
वर्ष 2001 में श्वेनत्सांग स्मृति हॉल को इसके पुनरूद्धार, संरक्षण एवं सृजनात्मक विकास के लिए नव नालंदा महाविहार को सौंप दिया गया। हालाकि संग्रहालय के स्मृति-हॉल का निर्माण कार्य 1961 में शुरू हुआ था किन्तु अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण यह निर्माण कार्य पूरा न हो सका। वर्ष 2001 ई॰ में निर्माण कार्य को पुनः शुरू करने का प्रयास हुआ और नव नालंदा महाविहार के निदेशक रवीन्द्र पंथ को इसे सौंप दिया गया। स्मृति हॉल के जीर्णोद्वार के लिए एक समिति बनाकर कलात्मक एवं सृजनात्मक कार्य करने के प्रस्ताव को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया। वर्ष 2005 में दोनों देषों के विषेषज्ञ समिति स्मृति हॉल संग्रहालय के पुननिर्माण एवं कलात्मक कार्य को आगे बढ़ाने की सिफारिष की। वर्ष 2006 निर्माण कार्य पूरा हुआ और 12 फरवरी 2007 को श्वेनत्सांग स्मृति संग्रहालय का विधिवत् उदघाटन भारत और चीन के उच्चाधिकारियों द्वारा किया गया।
नव नालंदा महाविहार इसके लिए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, चीनी सरकार एवं चीनी लोगों तथा अन्य बौद्ध संगठनों का आभारी है कि उन्होंने इस योजना को सम्मन पूरा करने सहयोग प्रदान किए। श्वेनत्सांग-स्मृति भवन भारत-चीन पुरानी सभ्यता एवं मैत्री का एक प्रतीक है।

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नव नालन्दा महाविहार
(मानित विश्वविद्यालय)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
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